Category: Gulzar Poems

Gulzar Poems in Hindi | बीते रिश्ते तलाश करती है

Gulzar Poems in Hindi | बीते रिश्ते तलाश करती है Gulzar Poems in Hindi बीते रिश्ते तलाश करती है ख़ुशबू ग़ुंचे तलाश करती है जब गुज़रती है उस गली से सबा ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार पीले पत्ते तलाश करती है एक उम्मीद बार बार आ कर अपने […]

Gulzar Poems in Hindi | बस एक लम्हे का झगड़ा था

Gulzar Poems in Hindi | बस एक लम्हे का झगड़ा था Gulzar Poems in Hindi बस एक लम्हे का झगड़ा था दर-ओ-दीवार पे ऐसे छनाके से गिरी आवाज़ जैसे काँच गिरता है हर एक शय में गई उड़ती हुई, चलती हुई, किरचें नज़र में, बात में, लहजे में, सोच और साँस के अन्दर लहू होना […]

Gulzar Poems in Hindi | प्यार वो बीज है

Gulzar Poems in Hindi | प्यार वो बीज है Gulzar Poems in Hindi प्यार कभी इकतरफ़ा होता है; न होगा दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये प्यार अकेला नहीं जी सकता जीता है तो दो लोगों में मरता है तो दो मरते हैं प्यार इक बहता दरिया है झील नहीं कि जिसको […]

Gulzar Poems in Hindi | बड़ी तकलीफ़ होती है

Gulzar Poems in Hindi | बड़ी तकलीफ़ होती है Gulzar Poems in Hindi मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू सुना है आबशारों को बड़ी तकलीफ़ होती है(१) खुदारा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को चरागों से मज़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है(२) कहू क्या वो बड़ी […]

Gulzar Poems in Hindi | बोलिये सुरीली बोलियाँ

Gulzar Poems in Hindi | बोलिये सुरीली बोलियाँ Gulzar Poems in Hindi बोलिये सुरीली बोलियाँ खट्टी मीठी आँखों की रसीली बोलियाँ रात में घोले चाँद की मिश्री दिन के ग़म नमकीन लगते हैं नमकीन आँखों की नशिली बोलियाँ गूंज रहे हैं डूबते साये शाम की खुशबू हाथ ना आये गूंजती आँखों की नशिली बोलियाँ फिल्म […]

Gulzar Poems in Hindi | यारम

Gulzar Poems in Hindi | यारम Gulzar Poems in Hindi हम चीज़ हैं बड़े काम की, यारम हमें काम पे रख लो कभी, यारम हम चीज़ हैं बड़े काम की, यारम हो सूरज से पहले जगायेंगे और अखबार की सब सुर्खियाँ हम गुनगुनाएँगे पेश करेंगे गरम चाय फिर कोई खबर आई न पसंद तो एंड […]

Gulzar Poems in Hindi | किताबें झाँकती हैं

Gulzar Poems in Hindi | किताबें झाँकती हैं Gulzar Poems in Hindi किताबें झाँकती है बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती है महीनों अब मुलाक़ातें नही होती जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थी अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के परदे पर बड़ी बैचेन रहती है किताबें उन्हें अब नींद […]

Gulzar Poems in Hindi | माँ उपले थापा करती थी

Gulzar Poems in Hindi | माँ उपले थापा करती थी Gulzar Poems in Hindi छोटे थे, माँ उपले थापा करती थी हम उपलों पर शक्लें गूँथा करते थे आँख लगाकर – कान बनाकर नाक सजाकर – पगड़ी वाला, टोपी वाला मेरा उपला – तेरा उपला – अपने-अपने जाने-पहचाने नामों से उपले थापा करते थे हँसता-खेलता […]

Gulzar Poems in Hindi | मकान की ऊपरी मंज़िल पर

Gulzar Poems in Hindi | मकान की ऊपरी मंज़िल पर Gulzar Poems in Hindi मकान की ऊपरी मंज़िल पर अब कोई नहीं रहता वो कमरे बंद हैं कबसे जो 24 सीढियां जो उन तक पहुँचती थी, अब ऊपर नहीं जाती मकान की ऊपरी मंज़िल पर अब कोई नहीं रहता वहाँ कमरों में, इतना याद है […]

Gulzar Poems in Hindi | मेरे रौशनदान में बैठा एक कबूतर

Gulzar Poems in Hindi | मेरे रौशनदान में बैठा एक कबूतर Gulzar Poems in Hindi मेरे रौशनदार में बैठा एक कबूतर जब अपनी मादा से गुटरगूँ कहता है लगता है मेरे बारे में, उसने कोई बात कही। शायद मेरा यूँ कमरे में आना और मुख़ल होना उनको नावाजिब लगता है। उनका घर है रौशनदान में […]