Category: Gulzar Poems

Gulzar Poems in Hindi | बारिश आने से पहले

Gulzar Poems in Hindi | बारिश आने से पहले Gulzar Poems in Hindi बारिश आने से पहले बारिश से बचने की तैयारी जारी है सारी दरारें बन्द कर ली हैं और लीप के छत, अब छतरी भी मढ़वा ली है खिड़की जो खुलती है बाहर उसके ऊपर भी एक छज्जा खींच दिया है मेन सड़क […]

Gulzar Poems in Hindi | एक नदी की बात सुनी

Gulzar Poems in Hindi | एक नदी की बात सुनी Gulzar Poems in Hindi एक नदी की बात सुनी… इक शायर से पूछ रही थी रोज़ किनारे दोनों हाथ पकड़ कर मेरे सीधी राह चलाते हैं रोज़ ही तो मैं नाव भर कर, पीठ पे लेकर कितने लोग हैं पार उतार कर आती हूँ । […]

Gulzar Poems in Hindi | दरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में

Gulzar Poems in Hindi | दरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में Gulzar Poems in Hindi दरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में पहाड़ी जंगलों के बाहर फेंक आते हैं ! मगर वो शाम… फिर से लौट आती है, रात के अन्धेरे में वो दिन उठा के पीठ पर जिसे मैं जंगलों […]

Gulzar Poems in Hindi | हमें पेड़ों की पोशाकों से इतनी-सी ख़बर तो मिल ही जाती है

Gulzar Poems in Hindi | हमें पेड़ों की पोशाकों से इतनी-सी ख़बर तो मिल ही जाती है Gulzar Poems in Hindi हमें पेड़ों की पोशाकों से इतनी सी ख़बर तो मिल ही जाती है बदलने वाला है मौसम… नये आवेज़े कानों में लटकते देख कर कोयल ख़बर देती है बारी आम की आई…! कि बस […]

Gulzar Poems in Hindi | ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का

Gulzar Poems in Hindi | ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का Gulzar Poems in Hindi ज़ुबान पर ज़ाएका आता था जो सफ़हे पलटने का अब उँगली ‘क्लिक’ करने से बस इक झपकी गुज़रती है बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है परदे पर किताबों से जो जाती राब्ता था, कट गया है […]

Gulzar Poems in Hindi | अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है

Gulzar Poems in Hindi | अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है Gulzar Poems in Hindi अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो! अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं अभी तो किरदार ही बुझे हैं। […]

Gulzar Poems in Hindi | किस क़दर सीधा सहल साफ़ है यह रस्ता देखो

Gulzar Poems in Hindi | किस क़दर सीधा सहल साफ़ है यह रस्ता देखो Gulzar Poems in Hindi किस क़दर सीधा सहल साफ़ है यह रस्ता देखो न किसी शाख़ का साया है, न दीवार की टेक न किसी आँख की आहट, न किसी चेहरे का शोर न कोई दाग़ जहाँ बैठ के सुस्ताए कोई […]

Gulzar Poems in Hindi | बर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से

Gulzar Poems in Hindi | बर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से Gulzar Poems in Hindi बर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से और वादी से कोहरा सिमटेगा बीज अंगड़ाई लेके जागेंगे अपनी अलसाई आँखें खोलेंगे सब्ज़ा बह निकलेगा ढलानों पर गौर से देखना बहारों में पिछले मौसम के भी निशाँ होंगे कोंपलों की उदास आँखों में आँसुओं की […]

Gulzar Poems in Hindi | सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर

Gulzar Poems in Hindi | सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर Gulzar Poems in Hindi सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर चमकती चिंगारियाँ-सी चकरा रहीं आँखों की पुतलियों में नज़र पे चिपके हुए हैं कुछ चिकने-चिकने से रोशनी के धब्बे जो पलकें मूँदूँ तो चुभने लगती हैं रोशनी की सफ़ेद किरचें […]

Gulzar Poems in Hindi | वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा

Gulzar Poems in Hindi | वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा Gulzar Poems in Hindi वक़्त को आते न जाते न गुजरते देखा न उतरते हुए देखा कभी इलहाम की सूरत जमा होते हुए एक जगह मगर देखा है शायद आया था वो ख़्वाब से दबे पांव ही और जब आया ख़्यालों को […]