Category: Harivansh Rai Bachchan Poems

Harivansh Rai Bachchan Poems | आत्मदीप

Harivansh Rai Bachchan Poems | आत्मदीप Harivansh Rai Bachchan Poems मुझे न अपने से कुछ प्यार, मिट्टी का हूँ, छोटा दीपक, ज्योति चाहती, दुनिया जब तक, मेरी, जल-जल कर मैं उसको देने को तैयार पर यदि मेरी लौ के द्वार, दुनिया की आँखों को निद्रित, चकाचौध करते हों छिद्रित मुझे बुझा दे बुझ जाने से […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | आज फिर से

Harivansh Rai Bachchan Poems | आज फिर से Harivansh Rai Bachchan Poems आज फिर से आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।   है कंहा वह आग जो मुझको जलाए, है कंहा वह ज्वाल पास मेरे आए,   रागिनी, तुम आज दीपक राग गाओ; आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।   तुम […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | आदर्श प्रेम

Harivansh Rai Bachchan Kavita | आदर्श प्रेम Harivansh Rai Bachchan Kavita प्यार किसी को करना लेकिन कह कर उसे बताना क्या अपने को अर्पण करना पर और को अपनाना क्या गुण का ग्राहक बनना लेकिन गा कर उसे सुनाना क्या मन के कल्पित भावों से औरों को भ्रम में लाना क्या ले लेना सुगंध सुमनों […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | चल मरदाने

Harivansh Rai Bachchan Poems | चल मरदाने Harivansh Rai Bachchan Poems चल मरदाने, सीना ताने, हाथ हिलाते, पांव बढाते, मन मुस्काते, गाते गीत । एक हमारा देश, हमारा वेश, हमारी कौम, हमारी मंज़िल, हम किससे भयभीत । चल मरदाने, सीना ताने, हाथ हिलाते, पांव बढाते, मन मुस्काते, गाते गीत । हम भारत की अमर जवानी, […]

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi | प्रतीक्षा

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi | प्रतीक्षा Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी प्रिय तुम आते तब क्या होता?   मौन रात इस भान्ति कि जैसे, कोइ गत वीणा पर बज कर अभी अभी सोयी खोयी सी, सपनो में तारों पर सिर धर और दिशाओं से प्रतिध्वनियां जाग्रत सुधियों […]

Harivansh Rai Bachchan | साजन आ‌ए, सावन आया

Harivansh Rai Bachchan | साजन आ‌ए, सावन आया Harivansh Rai Bachchan अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं, साजन आ‌ए, सावन आया। धरती की जलती साँसों ने मेरी साँसों में ताप भरा, सरसी की छाती दरकी तो कर घाव ग‌ई मुझपर गहरा, है नियति-प्रकृति की ऋतु‌ओं में संबंध कहीं कुछ अनजाना, अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं, साजन […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज Harivansh Rai Bachchan Kavita नागाधिराज श्रृंग पर खडी हु‌ई, समुद्र की तरंग पर अडी हु‌ई, स्वदेश में जगह-जगह गडी हु‌ई, अटल ध्वजा हरी,सफेद केसरी!   न साम-दाम के समक्ष यह रुकी, न द्वन्द-भेद के समक्ष यह झुकी, सगर्व आस शत्रु-शीश पर ठुकी, निडर ध्वजा हरी, सफेद केसरी!   […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | पतझड़ की शाम

Harivansh Rai Bachchan Poems | पतझड़ की शाम Harivansh Rai Bachchan Poems है यह पतझड़ की शाम, सखे !   नीलम-से पल्लव टूट ग‌ए, मरकत-से साथी छूट ग‌ए, अटके फिर भी दो पीत पात जीवन-डाली को थाम, सखे ! है यह पतझड़ की शाम, सखे !   लुक-छिप करके गानेवाली, मानव से शरमानेवाली कू-कू कर […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज Harivansh Rai Bachchan Kavita नागाधिराज श्रृंग पर खडी हु‌ई, समुद्र की तरंग पर अडी हु‌ई, स्वदेश में जगह-जगह गडी हु‌ई, अटल ध्वजा हरी,सफेद केसरी!   न साम-दाम के समक्ष यह रुकी, न द्वन्द-भेद के समक्ष यह झुकी, सगर्व आस शत्रु-शीश पर ठुकी, निडर ध्वजा हरी, सफेद केसरी!   […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | पतझड़ की शाम

Harivansh Rai Bachchan Kavita | पतझड़ की शाम Harivansh Rai Bachchan Kavita है यह पतझड़ की शाम, सखे !   नीलम-से पल्लव टूट ग‌ए, मरकत-से साथी छूट ग‌ए, अटके फिर भी दो पीत पात जीवन-डाली को थाम, सखे ! है यह पतझड़ की शाम, सखे !   लुक-छिप करके गानेवाली, मानव से शरमानेवाली कू-कू कर […]