Category: Kumar Vishwas Poems

Kumar Vishwas | आना तुम

Kumar Vishwas | आना तुम Kumar Vishwas आना तुम मेरे घर अधरों पर हास लिये तन-मन की धरती पर झर-झर-झर-झर-झरना साँसों मे प्रश्नों का आकुल आकाश लिये तुमको पथ में कुछ मर्यादाएँ रोकेंगी जानी-अनजानी सौ बाधाएँ रोकेंगी लेकिन तुम चन्दन सी, सुरभित कस्तूरी सी पावस की रिमझिम सी, मादक मजबूरी सी सारी बाधाएँ तज, बल […]

Kumar Vishwas Poems in Hindi | मेरे पहले प्यार

Kumar Vishwas Poems in Hindi | मेरे पहले प्यार Kumar Vishwas Poems in Hindi ओ प्रीत भरे संगीत भरे! ओ मेरे पहले प्यार! मुझे तू याद न आया कर ओ शक्ति भरे अनुरक्ति भरे! नस-नस के पहले ज्वार! मुझे तू याद न आया कर। पावस की प्रथम फुहारों से जिसने मुझको कुछ बोल दिये मेरे […]

Kumar Vishwas Poems | मुक्तक

Kumar Vishwas Poems | मुक्तक Kumar Vishwas Poems बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन||1|| जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है, […]

Kumar Vishwas Poems in Hindi | भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा

Kumar Vishwas Poems in Hindi | भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा Kumar Vishwas Poems in Hindi भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा कभी […]

Kumar Vishwas | कोई दीवाना कहता है (कविता)

Kumar Vishwas | कोई दीवाना कहता है (कविता) Kumar Vishwas कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी […]

Kumar Vishwas Poems | होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

Kumar Vishwas Poems | होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो Kumar Vishwas Poems दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, […]

Kumar Vishwas Poems in Hindi | हो काल गति से परे चिरंतन

Kumar Vishwas Poems in Hindi | हो काल गति से परे चिरंतन Kumar Vishwas Poems in Hindi हो काल गति से परे चिरंतन, अभी यहाँ थे अभी यही हो। कभी धरा पर कभी गगन में, कभी कहाँ थे कभी कहीं हो। तुम्हारी राधा को भान है तुम, सकल चराचर में हो समाये। बस एक मेरा […]

Kumar Vishwas Poems in Hindi | हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें

Kumar Vishwas Poems in Hindi | हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें Kumar Vishwas Poems in Hindi हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें कितने एकाकी हैं प्यार कर तुम्हें जिस पल हल्दी लेपी होगी तन पर माँ ने जिस पल सखियों ने सौंपी होंगीं सौगातें ढोलक की थापों में, घुँघरू की रुनझुन में घुल कर […]

Kumar Vishwas Poems | साल मुबारक

Kumar Vishwas Poems | साल मुबारक Kumar Vishwas Poems उम्र बाँटने वाले उस ठरकी बूढ़े ने दिन लपेट कर भेज दिए हैं नए कैलेंडर की चादर में इनमें कुछ तो ऐसे होंगे जो हम दोनों के साझे हों। सब से पहले उन्हें छाँट कर गिन तो लूँ मैं! तब बोलूँगा ‘साल मुबारक‘ वरना अपना पहले […]

Kumar Vishwas Poems in Hindi | सफ़ाई मत देना

Kumar Vishwas Poems in Hindi | सफ़ाई मत देना Kumar Vishwas Poems in Hindi एक शर्त पर मुझे निमन्त्रण है मधुरे स्वीकार सफ़ाई मत देना! अगर करो झूठा ही चाहे, करना दो पल प्यार सफ़ाई मत देना अगर दिलाऊँ याद पुरानी कोई मीठी बात दोष मेरा होगा अगर बताऊँ कैसे झेला प्राणों पर आघात दोष […]