Category: Uncategorized

Gulzar Poems in Hindi | वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था

Gulzar Poems in Hindi | वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था Gulzar Poems in Hindi वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था हवाओं का रुख़ दिखा रहा था कुछ और भी हो गया नुमायाँ मैं अपना लिखा मिटा रहा था उसी का इमान बदल गया है कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था वो एक […]

Gulzar Poems in Hindi | शाम से आँख में नमी सी है

Gulzar Poems in Hindi | शाम से आँख में नमी सी है Gulzar Poems in Hindi शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर इस की आदत भी आदमी सी […]

Gulzar Poems in Hindi | साँस लेना भी कैसी आदत है

Gulzar Poems in Hindi | साँस लेना भी कैसी आदत है Gulzar Poems in Hindi साँस लेना भी कैसी आदत है जीये जाना भी क्या रवायत है कोई आहट नहीं बदन में कहीं कोई साया नहीं है आँखों में पाँव बेहिस हैं, चलते जाते हैं इक सफ़र है जो बहता रहता है कितने बरसों से, […]

Gulzar Poems in Hindi | एक परवाज़ दिखाई दी है

Gulzar Poems in Hindi | एक परवाज़ दिखाई दी है Gulzar Poems in Hindi एक परवाज़ दिखाई दी है तेरी आवाज़ सुनाई दी है जिस की आँखों में कटी थी सदियाँ उस ने सदियों की जुदाई दी है सिर्फ़ एक सफ़ाह पलट कर उस ने बीती बातों की सफ़ाई दी है फिर वहीं लौट के […]

Gulzar Poems in Hindi | दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

Gulzar Poems in Hindi | दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई Gulzar Poems in Hindi दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पक गया है शज़र पे फल शायद फिर से पत्थर उछालता है कोई फिर नज़र में […]

Gulzar Poetry in Hindi | पूरे का पूरा आकाश घुमा कर

Gulzar Poetry in Hindi | पूरे का पूरा आकाश घुमा कर Gulzar Poetry in Hindi पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने, पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने काले घर में सूरज चलके, तुमने शायद सोचा था मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे. मैने एक चराग जलाकर रोशनी कर ली, अपना […]

Gulzar Poetry in Hindi | सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर

Gulzar Poetry in Hindi | सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर Gulzar Poetry in Hindi सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर चमकती चिंगारियाँ-सी चकरा रहीं आँखों की पुतलियों में नज़र पे चिपके हुए हैं कुछ चिकने-चिकने से रोशनी के धब्बे जो पलकें मूँदूँ तो चुभने लगती हैं रोशनी की सफ़ेद किरचें […]

Gulzar Poetry in Hindi | चौदहवीं रात के इस चाँद तले

Gulzar Poetry in Hindi | चौदहवीं रात के इस चाँद तले Gulzar Poetry in Hindi चौदहवीं रात के इस चाँद तले सुरमई रात में साहिल के क़रीब दूधिया जोड़े में आ जाए जो तू ईसा के हाथ से गिर जाए सलीब बुद्ध का ध्यान चटख जाए ,कसम से तुझ को बर्दाश्त न कर पाए खुदा […]

Gulzar Poetry in Hindi | बस एक चुप सी लगी है

Gulzar Poetry in Hindi | बस एक चुप सी लगी है Gulzar Poetry in Hindi बस एक चुप सी लगी है, नहीं उदास नहीं! कहीं पे सांस रुकी है! नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!! कोई अनोखी नहीं, ऐसी ज़िन्दगी लेकिन! खूब न हो, मिली जो खूब मिली है! नहीं उदास नहीं, […]